Tuesday, May 28, 2013

कहॉ चॉदनी चॉदी सी है.







आज भी ह्र्दय में तेरी साँसे की सरारत सी है....
अधरो से बुझाई जो प्यास अधरो पे बाकी सी है.
धड़कनें थाम लें आज भी गर तू जरा देर साथ हो..
तेरे हाथों की हल्की सी छुअन मेरे बालों में बाकी सी है..

तेरे केशुओ में छिपकर वो सोना, वो नीँद आधी सी है.
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तेरी लबो‍ तक आयी जो बात, वो बिन कहे सुनी सुनाई सी है..
नदी के बीच तेरे हाथो को थामना अब थमी वो पुरवाई सी है..
रात भर चॉद को देखा पर अब कहॉ चॉदनी चॉदी सी है.
                                         

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