मुसाफिरो का ठिकाना तय ये हुआ तो कब
शहर में अॅधेरा होना तय ये हुआ तो कब
जमी ऑखों से दूर् जाती जा रही तो क्यू
सब तरफ उधल पुथल फिर खामोशी तो क्यू
साखो से उडी चिड़िया भी चुप सी उडी तो क्यू
अब धान चुराऊ तो किसका ये सब हुआ तो क्यू
सुरज भी उगना नहीं चाहे ये हुआ क्यू
अॅधेरा तो पहले से था फिर सब का चेहरा ये ढका हुआ तो क्यू..
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