तबियत खास मर्ज की वैद्य तय कर नहीँ पाया
पर भानु अब कहॉ वो नाड़ियो वाले वैद्य मिलते है
शिकार किया उसने मेरा चारो तरफ से घेरकर
पता करो भानु रात के जख्म रात ही में कैसे भरते है
सियासत करता है दिल की हुकूमत पर नादान
पर भानु ये वो दरिया है जिसे तैर कर नहीँ डूब कर पार उतरते है
साँसों की उधेड़बुन में खलल सा पड़ गया है
पता करो भानु ये इश्क़ के रेशे कहाँ पर जाकर सुलझते है
रोशनी नहीँ पहुँची अभी तक ज़मी पर सूरज की
चलो भानु अभी तो रात है थोड़ा सा और सोते है
गर रस्ते में रुकावट आये तो क्या रूकेगें हम
नही भानु लक्ष्य है एक रस्ते एक थोड़ेही चलो दूसरा रास्ता पकड़ते है
तेजपन से धरती तपती मॉ प्यारी बोझों मरती
पता लगाओ भानु उनका जो क़यामत के दिन से नहीँ डरते है
वो कहती है कुछ मेरे लिये लिखो तो अच्छा लगेगा
पगली लिखतों दूँ पर इश्क़ होने में कोई दिन थोड़े ही लगते है...
पर भानु अब कहॉ वो नाड़ियो वाले वैद्य मिलते है
शिकार किया उसने मेरा चारो तरफ से घेरकर
पता करो भानु रात के जख्म रात ही में कैसे भरते है
सियासत करता है दिल की हुकूमत पर नादान
पर भानु ये वो दरिया है जिसे तैर कर नहीँ डूब कर पार उतरते है
साँसों की उधेड़बुन में खलल सा पड़ गया है
पता करो भानु ये इश्क़ के रेशे कहाँ पर जाकर सुलझते है
रोशनी नहीँ पहुँची अभी तक ज़मी पर सूरज की
चलो भानु अभी तो रात है थोड़ा सा और सोते है
गर रस्ते में रुकावट आये तो क्या रूकेगें हम
नही भानु लक्ष्य है एक रस्ते एक थोड़ेही चलो दूसरा रास्ता पकड़ते है
तेजपन से धरती तपती मॉ प्यारी बोझों मरती
पता लगाओ भानु उनका जो क़यामत के दिन से नहीँ डरते है
वो कहती है कुछ मेरे लिये लिखो तो अच्छा लगेगा
पगली लिखतों दूँ पर इश्क़ होने में कोई दिन थोड़े ही लगते है...
Wah kya baat hai. Awesome
ReplyDelete